नई सुबह का पैगाम
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: निकलता, बदलता
Radeef: है
अंधेरों से लड़कर जो सूरज निकलता है,
हर सुबह एक नया पैगाम देता है।
उठो, जागो, अपनी राह ख़ुद बनाओ तुम,
कि मेहनत करने वालों का ही वक़्त बदलता है।
हर सुबह एक नया पैगाम देता है।
उठो, जागो, अपनी राह ख़ुद बनाओ तुम,
कि मेहनत करने वालों का ही वक़्त बदलता है।
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: जानता, रहता
Radeef: है
राहों में अगर कांटे बिछे हों तो क्या,
क़दमों में तेरे दम है, ये ज़माना जानता है।
तूफ़ानों से टकराना तेरी फ़ितरत में है,
मंज़िल उसी को मिलती है जो चलता रहता है।
क़दमों में तेरे दम है, ये ज़माना जानता है।
तूफ़ानों से टकराना तेरी फ़ितरत में है,
मंज़िल उसी को मिलती है जो चलता रहता है।
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: जलाए, बढ़ाए
Radeef: रखना
कभी गर लगे कि राहें मुश्किल हैं बहुत,
अपने अंदर की रौशनी को जलाए रखना।
हर ठोकर सिखाएगी एक नया सबक़,
बस हौसलों की उड़ान को बढ़ाए रखना।
अपने अंदर की रौशनी को जलाए रखना।
हर ठोकर सिखाएगी एक नया सबक़,
बस हौसलों की उड़ान को बढ़ाए रखना।