मोहब्बत का दस्तूर

Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: वफ़ा, अदा, सज़ा, दवा, फ़ना, बक़ा

Radeef: है


तेरी चाहत में दिल यूँ ही फ़ना है।
ये कैसी मोहब्बत की प्यारी सज़ा है।

नज़र मिलते ही इक अजीब सी अदा है।
हर साँस में बस तेरा ही नशा है।

जो दर्द तूने दिया, वो भी दवा है।
तेरी यादों में हर पल इक मज़ा है।

शिकायत नहीं कोई इस दुनिया से,
ये इश्क़ की कैसी अनोखी वफ़ा है।

'फ़ुरक़ान' की ज़िंदगी का हासिल यही,
तेरी उल्फ़त में ही उसकी बक़ा है।



Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: निशान, पहचान, निगहबान, अरमान, जहान, ज़ुबान, शान, उड़ान, बयान, आन

Radeef: है


मेरी हर साँस पे तेरा ही निशान है।
तेरी मोहब्बत ही मेरी पहचान है।

मेरे दिल की तू ही तो निगहबान है।
तेरी चाहत ही मेरा हर अरमान है।

तेरी यादों से रोशन मेरा जहान है।
तेरी बातें ही मेरी मीठी ज़ुबान है।

ये इश्क़ तेरा ही तो मेरी शान है।
तेरी उल्फ़त में ही मेरी उड़ान है।

'फ़ुरक़ान' की ज़िंदगी का ये ही बयान है,
तेरा नाम ही उसकी हर आन है।



Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: असर, नज़र, शहर, सफ़र, ख़बर, बेख़बर, डगर, रहगुज़र, सर, हुनर

Radeef: है


तेरी चाहत का मुझ पे गहरा असर है।
हर सू तेरी ही मुझको अब नज़र है।

तेरे बिन हर शहर वीरान सा है।
तेरी यादों में कटता मेरा हर सफ़र है।

न जाने कब होगी तेरी मुझको ख़बर,
के ये दिल तेरे इश्क़ में बेख़बर है।

हर राह पे तू ही मेरी डगर है।
तेरी मोहब्बत ही मेरी रहगुज़र है।

'फ़ुरक़ान' की ज़िंदगी का बस ये ही सर है,
तेरा नाम ही उसका सच्चा हुनर है।