मोहब्बत की दास्तान
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: जाना, माना, फ़साना, तराना
Radeef: है
तेरी आँखों में जो नशा है, वो मयख़ाना है,
मेरे दिल का तू ही तो एक अफ़साना है।
जबसे देखा तुझे, होश गुम हो गए, तू ही मेरा सब कुछ,
मेरे जीवन का तू ही तो एक तराना है।
बिना तेरे हर पल लगे जैसे सदियों का,
तुझसे ही तो मेरा हर इक ख़ज़ाना है।
ये मोहब्बत नहीं तो और क्या है, बता दे, Furkan
हर तरफ़ तेरा ही तो जलवा, तेरी ही तो याराना है।
मेरे दिल का तू ही तो एक अफ़साना है।
जबसे देखा तुझे, होश गुम हो गए, तू ही मेरा सब कुछ,
मेरे जीवन का तू ही तो एक तराना है।
बिना तेरे हर पल लगे जैसे सदियों का,
तुझसे ही तो मेरा हर इक ख़ज़ाना है।
ये मोहब्बत नहीं तो और क्या है, बता दे, Furkan
हर तरफ़ तेरा ही तो जलवा, तेरी ही तो याराना है।
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: राहें, बाहें, निगाहें, पनाहें
Radeef: हैं
तेरी यादों में खोया रहता हूँ, ये कैसी राहें,
सुकून मिलता है जब तू थाम ले मेरी बाहें।
हर तरफ़ तेरी ही सूरत नज़र आती है, ओ हसीं,
मेरी दुनिया में बस तेरी ही निगाहें हैं।
ख्वाबों में तेरी पनाहें ही मिलती हैं मुझको,
तेरी मोहब्बत में ही मेरी पनाहें हैं।
ये दिल दीवाना तेरे इश्क़ में, Furkan कहता है,
सारी कायनात में बस तू ही मेरी पनाहें हैं।
सुकून मिलता है जब तू थाम ले मेरी बाहें।
हर तरफ़ तेरी ही सूरत नज़र आती है, ओ हसीं,
मेरी दुनिया में बस तेरी ही निगाहें हैं।
ख्वाबों में तेरी पनाहें ही मिलती हैं मुझको,
तेरी मोहब्बत में ही मेरी पनाहें हैं।
ये दिल दीवाना तेरे इश्क़ में, Furkan कहता है,
सारी कायनात में बस तू ही मेरी पनाहें हैं।