हिम्मत की मशाल
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: खुदा, जुदा, अदा, वफ़ा
Radeef: सदा
जब भी लगे कि राहें हैं मुश्किल, रख हिम्मत सदा।
तेरा ही हाथ थामेगा, जो है तेरा खुदा सदा।
न हो मायूस, ये वक़्त भी गुज़रेगा, न हो जुदा।
बदल दे रुख हवाओं का, तेरी है ये अदा सदा।
गिर के उठना, उठ के चलना, यही तो है वफ़ा।
मंज़िलें मिलेंगी तुझको, रख हौसला सदा।
तेरा ही हाथ थामेगा, जो है तेरा खुदा सदा।
न हो मायूस, ये वक़्त भी गुज़रेगा, न हो जुदा।
बदल दे रुख हवाओं का, तेरी है ये अदा सदा।
गिर के उठना, उठ के चलना, यही तो है वफ़ा।
मंज़िलें मिलेंगी तुझको, रख हौसला सदा।
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: नहीं, कहीं, यहीं, वही, कही
Radeef: सही
जो डर गया वो रह गया, मंज़िल मिली नहीं सही।
तू चल पड़ा तो पाएगा, राहें मिलेंगी कहीं सही।
हौसलों में जान भर, खुद पे रख यकीन तू यहीं।
ज़िन्दगी है इम्तिहान, हर पल कुछ नया सिखाती सही।
हार को भी जीत कर, आगे बढ़ता जा तू वही।
तेरी मेहनत रंग लाएगी, यह बात है कही सही।
तू चल पड़ा तो पाएगा, राहें मिलेंगी कहीं सही।
हौसलों में जान भर, खुद पे रख यकीन तू यहीं।
ज़िन्दगी है इम्तिहान, हर पल कुछ नया सिखाती सही।
हार को भी जीत कर, आगे बढ़ता जा तू वही।
तेरी मेहनत रंग लाएगी, यह बात है कही सही।
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: राह, निगाह, चाह, पनाह, वाह, सलाह
Radeef: चाहिए
जोश हो दिल में, एक नई सी राह चाहिए।
मंज़िलों को छूने की, बस एक निगाह चाहिए।
गिरने से क्या डरना, उठने की चाह चाहिए।
हर कदम पे हौसले की, बस एक पनाह चाहिए।
सपनों को हकीकत में बदलने की वाह चाहिए।
संघर्षों से लड़ने की, बस एक सलाह चाहिए।
मंज़िलों को छूने की, बस एक निगाह चाहिए।
गिरने से क्या डरना, उठने की चाह चाहिए।
हर कदम पे हौसले की, बस एक पनाह चाहिए।
सपनों को हकीकत में बदलने की वाह चाहिए।
संघर्षों से लड़ने की, बस एक सलाह चाहिए।