प्रेरणादायक नज़्म: उठो, बढ़ो, चलो - Furkan S Khan

Furkan S Khan की यह प्रेरणादायक नज़्म आपको जीवन में आगे बढ़ने और सपनों को साकार करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उठो, बढ़ो, चलो और अपनी मंज़िल पाओ।

Saturday, August 29, 2026
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प्रेरणादायक नज़्म: उठो, बढ़ो, चलो - Furkan S Khan
“प्रेरणादायक नज़्म: उठो, बढ़ो, चलो - Furkan S Khan”
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29 August 2026
Nazm — By Furkan S Khan
सूरज की किरणें तुम्हें बुलाती हैं, अंधेरी रात को दूर भगाती हैं। आँखों में जो सपने सजाती हैं, उन्हें हकीकत में बदलने का समय है, चलो।
Nazm — By Furkan S Khan
राहों में चाहे काँटे बिछे हों, कदमों में चाहे छाले पड़े हों। साँसों के पल चाहे थमे हों, मंज़िल तुम्हारी राह तकती है, बढ़ो।
Nazm — By Furkan S Khan
डर को अपने दिल से निकाल दो, जीत का परचम ऊँचा उछाल दो। हर चुनौती को गले लगा लो, अपनी मेहनत से किस्मत बदल दो।

उठो, बढ़ो, चलो

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: बुलाती, भगाती, सजाती  |  Radeef: हैं
सूरज की किरणें तुम्हें बुलाती हैं, अंधेरी रात को दूर भगाती हैं। आँखों में जो सपने सजाती हैं, उन्हें हकीकत में बदलने का समय है, चलो।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: बिछे, पड़े, थमे  |  Radeef: हों
राहों में चाहे काँटे बिछे हों, कदमों में चाहे छाले पड़े हों। साँसों के पल चाहे थमे हों, मंज़िल तुम्हारी राह तकती है, बढ़ो।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: निकाल, उछाल, लगा, बदल  |  Radeef: दो
डर को अपने दिल से निकाल दो, जीत का परचम ऊँचा उछाल दो। हर चुनौती को गले लगा लो, अपनी मेहनत से किस्मत बदल दो।

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Zainab
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