हरियाणा में 'छोरा तो चाहिए': 'बेटी बचाओ' पर हावी बेटे की चाहत, जमीनी हकीकत

हरियाणा में बेटे की चाहत 'बेटी बचाओ' अभियान को कैसे चुनौती दे रही है? जानिए जमीनी सच्चाई।

Wednesday, July 1, 2026
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हरियाणा में 'छोरा तो चाहिए': 'बेटी बचाओ' पर हावी बेटे की चाहत, जमीनी हकीकत
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01 July 2026
हरियाणा में 'छोरा तो चाहिए': 'बेटी बचाओ' पर हावी बेटे की चाहत, जमीनी हकीकत

मुख्य बातें

  • हरियाणा में बेटे की चाहत गहरी जड़ें जमाए हुए है।
  • 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के बावजूद जमीनी हकीकत अलग है।
  • सामाजिक और आर्थिक कारण लिंगानुपात पर असर डाल रहे हैं।

'छोरा तो चाहिए' की गूंज: जमीनी हकीकत को दर्शाती हरियाणा की सोच

हरियाणा, जिसे अक्सर बेटियों के भविष्य को लेकर शुरू किए गए 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे राष्ट्रीय अभियानों का गढ़ माना जाता है, वहां की सामाजिक सोच की एक और परत आज भी गहरी जड़ें जमाए हुए है। यह परत है बेटे की चाहत, जो कई बार 'बेटी बचाओ' के नारे पर भी भारी पड़ती दिखती है। जमीनी स्तर पर यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि एक ऐसी हकीकत है जो परिवारों के फैसलों और समाज की मानसिकता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

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Zainab Khatoon
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