आँखों का जहाँ
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: जहाँ, दवा, सिरा | Radeef: मिल गया
तेरी आँखों में देखा तो जहाँ मिल गया
मेरे हर दर्द को जैसे दवा मिल गया
अब क्या मांगू खुदा से मैं और
जो तेरे साथ जीने का सिरा मिल गया
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: जारी, भिखारी, खुद्दारी | Radeef: है
तेरी यादों का सिलसिला अब भी जारी है
ये दिल आज भी तेरी मोहब्बत का भिखारी है
तू आए तो बहारें लौट आएं ज़िंदगी में
वरना हर पल ये ज़िंदगी बस खुद्दारी है
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: ढल, पल, थम | Radeef: जाए
मेरी हर सुबह तेरी बाहों में ढल जाए
मेरी हर शाम तेरी पनाहों में पल जाए
ये ज़िंदगी तो बस एक सफ़र है जानम
जो तेरे साथ शुरू होकर तुझ पर ही थम जाए