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प्रेरणादायक ग़ज़ल: उम्मीद की लौ - Furkan S Khan
Furkan S Khan की यह प्रेरणादायक ग़ज़ल 'उम्मीद की लौ' आपको जीवन के हर संघर्ष में आगे बढ़ने और सफल होने की हिम्मत देगी।
Ghazal By Furkan S Khan
उम्मीद की लौ जलाकर हमें अब चलना है,
हर ठोकर से सीख लेकर हमें संभलना है।
जो राहों में काँटे बिछे हैं उन्हें कुचलना है,
हर दर्द और ग़म से आगे हमें निकलना है।
तक़दीर को अपने हाथों से अब बदलना है,
हर मुश्किल को राह से हटाकर हमें निकलना है।
जो बर्फ़ सी जमी है दिल में, उसे पिघलना है,
हर बेबसी के बोझ से अब हमें निकलना है।
Ghazal By Furkan S Khan
तेरे ख़्वाबों को परवाज़ देना ज़रूरी है,
उन्हें हक़ीक़त का अब अंदाज़ देना ज़रूरी है।
जो आँख में है नमी, उसे आबों से धोना ज़रूरी है,
हर क़दम पर खुद को नया हौसला देना ज़रूरी है।
जो ज़ेहन में है आग, उसे ताबों से जलाना ज़रूरी है,
हर बेबसी को अब दूर भगाना ज़रूरी है।
अपने हर पल का खुद ही हिसाबों से निकालना ज़रूरी है,
मंज़िल की राह पर अब तुझे चलना ज़रूरी है।
उम्मीद की लौ
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: चलना, संभलना, बदलना, पिघलना | Radeef: निकलना है
उम्मीद की लौ जलाकर हमें अब चलना है,
हर ठोकर से सीख लेकर हमें संभलना है।
जो राहों में काँटे बिछे हैं उन्हें कुचलना है,
हर दर्द और ग़म से आगे हमें निकलना है।
तक़दीर को अपने हाथों से अब बदलना है,
हर मुश्किल को राह से हटाकर हमें निकलना है।
जो बर्फ़ सी जमी है दिल में, उसे पिघलना है,
हर बेबसी के बोझ से अब हमें निकलना है।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: ख़्वाबों, आबों, ताबों, हिसाबों | Radeef: ज़रूरी है
तेरे ख़्वाबों को परवाज़ देना ज़रूरी है,
उन्हें हक़ीक़त का अब अंदाज़ देना ज़रूरी है।
जो आँख में है नमी, उसे आबों से धोना ज़रूरी है,
हर क़दम पर खुद को नया हौसला देना ज़रूरी है।
जो ज़ेहन में है आग, उसे ताबों से जलाना ज़रूरी है,
हर बेबसी को अब दूर भगाना ज़रूरी है।
अपने हर पल का खुद ही हिसाबों से निकालना ज़रूरी है,
मंज़िल की राह पर अब तुझे चलना ज़रूरी है।
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