इश्क़ की राह

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: बहार, क़रार, निखार, पुकार, खुमार, इंतज़ार  |  Radeef: में है
हर दिल में इक अनोखी सी बहार में है, जब से देखा है तुम्हें, दिल को क़रार में है। ये नज़र का जादू है, या हुस्न का निखार में है, हर साँस में बस तुम्हारी ही पुकार में है। भूल बैठे हैं जहाँ को, ऐसे खुमार में है, ज़िंदगी अब बस तुम्हारे ही इंतज़ार में है।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: जहान, निशान, बेजुबान, अरमान, इम्तिहान, जान  |  Radeef: है
ये मोहब्बत का रंग कितना हसीं जहान है, हर अदा में तेरी, एक अनोखा निशान है। क्या करें अब हम अपने दिल का, जो बेजुबान है, तेरी यादों में खोया, हर मेरा अरमान है। दो दिलों के दरमियान, ये कैसा इम्तिहान है, बस तू ही मेरी मंज़िल, बस तू ही मेरी जान है।