जुनून-ए-मंज़िल
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: जुनून, सुकून | Radeef: रहे
राहों में गर काँटे बिछे हों, तो क्या हुआ,
मंज़िल की चाहत से दिल में, जुनून रहे।
तूफान चाहे जितना भी आए, डटे रहना,
जीतने की धुन में हमेशा, सुकून रहे।
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: हिम्मत, अज़मत | Radeef: है
जो ठान ले तो कुछ भी नहीं नामुमकिन,
हर मुश्किल को झुका दे, ये तेरी हिम्मत है।
ना देख राहों की दुश्वारी, बस बढ़ता चल,
तेरी मंज़िल तेरी ही तो, अज़मत है।
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: याद, मुराद | Radeef: रहे
ये वक़्त है, ना इसको गवाओ बेकार में,
हर लम्हा एक नया अवसर, ये याद रहे।
जो सोया है, वो खोया है, ये सच जान लो,
जागो और बढ़ो, ये ज़िंदगी की मुराद रहे।