मंज़र: दृश्य, नज़ारा। उतर जाती है: गहरे बैठ जाती है। बिखर जाती है: फैल जाती है, टूट जाती है। आहट: आवाज़, पदचाप। वीरानियों: ख़ालीपन, उदासी।
परछाई: साया, छाया। साया: छाया, परछाई। ज़ख़्म: घाव। गलता है: पिघलता है, घुलता है।
तन्हाई: अकेलापन। बस जाती है: स्थायी हो जाती है। खो सी जाती है: गुम हो जाती है। ढल जाती है: बदल जाती है, समा जाती है।