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हम और ज़िंदगी
उदासी का मंज़र: दिल को छू लेने वाली हिंदी नज़्म
फ़ुरक़ान एस ख़ान की कलम से उदासी पर एक खूबसूरत नज़्म। पढ़ें और महसूस करें दिल के गहरे जज़्बात।
Thursday, September 10, 2026
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“उदासी का मंज़र: दिल को छू लेने वाली हिंदी नज़्म”
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Date
10 September 2026
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Nazm — By Furkan S Khan
एक ख़ामोशी है जो दिल में उतर जाती है
हर खुशी जैसे कहीं दूर बिखर जाती है
आँखों में नमी, लबों पर कोई आहट नहीं
ज़िंदगी जैसे वीरानियों से गुज़र जाती है
Kaafiya: उतर, बिखर, गुज़र
Radeef: जाती है
Nazm — By Furkan S Khan
एक साया है जो हर पल साथ चलता है
ज़ख़्म गहरा है, हर साँस में पलता है
कोई उम्मीद नहीं, कोई सहारा भी नहीं
यह दिल है जो बस आँसुओं में गलता है
Kaafiya: चलता, पलता, गलता
Radeef: है
Nazm — By Furkan S Khan
एक तन्हाई है जो दिल में बस जाती है
हर खुशी जैसे कहीं खो सी जाती है
आँखों में नमी, लबों पर कोई बात नहीं
ज़िंदगी बस एक उदासी में ढल जाती है
Kaafiya: बस, खो सी, ढल
Radeef: जाती है
मंज़र: दृश्य, नज़ारा। उतर जाती है: गहरे बैठ जाती है। बिखर जाती है: फैल जाती है, टूट जाती है। आहट: आवाज़, पदचाप। वीरानियों: ख़ालीपन, उदासी।
परछाई: साया, छाया। साया: छाया, परछाई। ज़ख़्म: घाव। गलता है: पिघलता है, घुलता है।
तन्हाई: अकेलापन। बस जाती है: स्थायी हो जाती है। खो सी जाती है: गुम हो जाती है। ढल जाती है: बदल जाती है, समा जाती है।
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