इश्क का दरिया - रूहानी हिंदी गज़ल

फरकान एस खान की कलम से मोहब्बत और इश्क पर लिखी एक खूबसूरत हिंदी गज़ल।

Tuesday, September 8, 2026
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इश्क का दरिया - रूहानी हिंदी गज़ल
“इश्क का दरिया - रूहानी हिंदी गज़ल”
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https://mail.vews.in/hum-aur-zindagi/ishq-ka-dariya-spiritual-hindi-ghazal
Date
08 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
हर धड़कन में बस एक तेरा ही साया है, दुनिया की भीड़ में तू ही मेरी माया है। तेरी यादों के सहारे काट ली उम्र मैंने, मोहब्बत का ये कैसा अजीब सा साया है।
Ghazal — By Furkan S Khan
तेरी आँखों के गहरे समंदर के नूर में, खो गया हूँ मैं अब अपनी ही रूह के सुरूर में। दुआ है ये मेरी कि तू सदा मुस्कुराती रहे, जी रहा हूँ मैं तो बस तेरी यादों के नूर में।

साया (परछाई/छाया), माया (भ्रम/संसारिक मोह)।

नूर (प्रकाश/चमक), सुरूर (नशा/आनंद)।

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Zainab
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