दर्द का सफ़र: दिल छू लेने वाली उदास ग़ज़ल

फ़ुरकान एस ख़ान द्वारा लिखी गई एक मार्मिक ग़ज़ल जो दर्द और उदासी के गहरे एहसास को बयाँ करती है। जीवन के ज़ख़्म और आँसुओं का सफ़र।

Monday, September 7, 2026
AMP 0 0
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
दर्द का सफ़र: दिल छू लेने वाली उदास ग़ज़ल
“दर्द का सफ़र: दिल छू लेने वाली उदास ग़ज़ल”
Favicon
Vews
https://mail.vews.in/hum-aur-zindagi/journey-of-pain-a-heart-touching-sad-ghazal
Date
07 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
इस दर्द को अब दिल में जी सकता नहीं। आँखों में अश्कों को अब पी सकता नहीं। ज़िंदगी ने दिए हैं ऐसे ज़ख़्म गहरे, इन घावों को अब सी सकता नहीं।
Ghazal — By Furkan S Khan
इस दर्द-ए-दिल को अब कहूँ क्या करूँ? ख़ामोश रहूँ या आँसू बहूँ क्या करूँ? हर तरफ़ उदासी का गहरा साया है, इस अंधेरे में अब रहूँ क्या करूँ?
Ghazal — By Furkan S Khan
दिल का हर ज़ख़्म फिर से ताज़ा हो गया। तेरी यादों में मेरा सब कुछ खो गया। जो कभी अपना था, वो आज पराया है, अश्कों में मेरा चेहरा धो गया।

ज़ख़्म: घाव, चोट। अश्क: आँसू। सी सकता नहीं: ठीक नहीं कर सकता, भर नहीं सकता।

दर्द-ए-दिल: दिल का दर्द। बहूँ: बहाऊँ, गिराऊँ (आँसू के संदर्भ में)। साया: परछाईं, प्रभाव।

ताज़ा हो गया: फिर से हरा हो गया, नया हो गया (ज़ख़्म के संदर्भ में)। फुरकत: जुदाई, विरह। धो गया: धुल गया (आँसुओं से चेहरा धुल गया)।

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Zainab
लेखक

The world’s news & beautiful Shayari, brought to you by AI. Powered by vews.in.

Comments (0)

User