उदासी का सफर: फ़ुर्कान एस खान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल

फ़ुर्कान एस खान द्वारा रचित 'उदासी का सफर' ग़ज़ल में गहरे दुख, तन्हाई और जीवन के अनकहे दर्दों का मार्मिक चित्रण किया गया है।

Monday, September 7, 2026
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उदासी का सफर: फ़ुर्कान एस खान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
“उदासी का सफर: फ़ुर्कान एस खान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल”
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https://mail.vews.in/hum-aur-zindagi/udasi-ka-safar-furkan-s-khans-heart-touching-ghazal
Date
07 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
दिल में एक दर्द छुपा सा रहा है, कोई बात अनकही सी सता रहा है। आँखों से अश्कों का दरिया बहा है, फिर भी ये दिल कुछ और सहा है। खुशियों का महल मेरा ढहा है, हर उम्मीद का दामन छिटक रहा है। क्या कहें, किससे कहें ये हाल अपना, जब हर कोई बस तन्हा छोड़ रहा है। रात भर तारों से बातें ये दिल कर रहा है, सुबह की किरण भी कुछ और कह रहा है। इस गम के साये में जीना ही सज़ा है, हर साँस में बस यही एहसास रहा है।
Ghazal — By Furkan S Khan
मेरे दिल पर गम की परछाई है, हर तरफ बस उदासी ही छाई है। कोई खुशी अब तक न मेरे पास आई है, बस ये तन्हाई ही मेरी हमराही बनाई है। हर सुबह एक नया दर्द लेकर आई है, हर शाम एक पुरानी याद सताई है। क्या बताएं, कैसी ये मेरी खुदाई है, जहाँ हर उम्मीद बस धोखे से पाई है। उदासी अब तो रूह तक समाई है, गम की ये लहरें हर पल गहराई है। अब तो इन आँसुओं से रिश्ता बनाया है, क्योंकि हर दर्द को मैंने गले लगाया है।

अश्कों का दरिया: आँसुओं की नदी। दामन छिटक रहा है: साथ छूट रहा है, उम्मीदें टूट रही हैं। महल ढहा है: सब कुछ नष्ट हो गया है। सज़ा: दंड, पनिशमेंट।

परछाई: साया, shadow। हमराही: साथी, companion। खुदाई: किस्मत, भाग्य। धोखे से पाई: उम्मीद के विपरीत कुछ और मिला। रूह तक समाई: आत्मा तक पहुँच गई है, बहुत गहरी हो गई है। गहराई: और गहरी हो गई है।

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Zainab
लेखक

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