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हम और ज़िंदगी
ग़म की परछाई: दिल को छू लेने वाली हिंदी नाज़्म | उदासी पर कविता
ग़म की परछाई नामक इस मार्मिक हिंदी नाज़्म में कवि ने उदासी और अकेलेपन की गहराई को बयां किया है। भावनाओं से भरी यह कविता हर दिल को छू लेगी।
Sunday, September 6, 2026
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“ग़म की परछाई: दिल को छू लेने वाली हिंदी नाज़्म | उदासी पर कविता”
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Date
06 September 2026
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Nazm — By Furkan S Khan
हर साँस में ग़म की परछाई है,
हर लम्हे में एक गहराई है।
न जाने किस राह पर आई है,
ये उदासी मेरी हमराही है।
Kaafiya: परछाई, गहराई, आई, हमराही
Radeef: है
Nazm — By Furkan S Khan
आँखों में नमी, लबों पर मुस्कान है,
ये कैसा अजीब सा इम्तिहान है।
दिल में छुपा हुआ एक तूफान है,
लगता है हर तरफ़ वीरान है।
Kaafiya: मुस्कान, इम्तिहान, तूफान, वीरान
Radeef: है
Nazm — By Furkan S Khan
मेरे शहर में उदासी का पहरा है,
हर गली में एक दर्द गहरा है।
ख़ामोशी का ये कैसा चेहरा है,
हर उम्मीद पर गम का डेरा है।
Kaafiya: पहरा, गहरा, चेहरा, डेरा
Radeef: है
परछाई: साया, छाया गहराई: बहुत अंदर तक हमराही: साथ चलने वाला, साथी
नमी: गीलापन, आँसू लबों: होंठों इम्तिहान: परीक्षा तूफान: आँधी, बहुत बड़ी हलचल वीरान: उजाड़, खाली
पहरा: निगरानी, चौकसी गहरा: बहुत अधिक, अंदर तक डेरा: पड़ाव, ठिकाना
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