इश्क़ का अफ़साना: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'इश्क़ का अफ़साना' एक खूबसूरत ग़ज़ल है जो प्रेम की गहराई और उसके हर पहलू को बयां करती है। दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ।

Tuesday, September 8, 2026
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इश्क़ का अफ़साना: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
“इश्क़ का अफ़साना: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल”
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https://mail.vews.in/hum-aur-zindagi/ishq-ka-afsana-furkan-s-khans-heart-touching-ghazal
Date
08 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
तेरे इश्क़ की एक ऐसी अनमोल कहानी बन गई है के हर धड़कन अब तेरी ही रवानी बन गई है। तेरी आँखों की वो चमक, वो हँसी की निशानी मेरी हर साँस की अब सच्ची ज़ुबानी बन गई है। ये दिल है तेरा आशिक़, ये रूह तेरी दीवानी तेरी चाहत में मेरी हर जिंदगानी बन गई है। न पूछो हमसे हाल-ए-दिल, बस इतना समझो के हर ग़म भी अब खुशी की निशानी बन गई है। ये इश्क़ है या है कोई जादू, समझ न आए के हर शय अब तेरी ही मेहरबानी बन गई है।
Ghazal — By Furkan S Khan
जो मोहब्बत की राह में निकला, वो क्या जाने कहाँ में है हर कदम पे एक नई मंज़िल, ये दिल तो बस हवा में है। तेरी एक निगाह से दुनिया बदल गई मेरी ये कैसा जादू है जो तेरी हर अदा में है। हर सांस में तेरी चाहत, हर धड़कन में तेरा नाम मेरी हर दुआ, हर इबादत, बस तेरी पनाह में है। ये इश्क़ का दरिया है, इसकी गहराई कौन नापे जो डूबा नहीं इसमें, वो क्या जाने क्या गुनाह में है। ये दिल तेरा हुआ, अब तेरा ही रहेगा सदा मेरी हर खुशी, हर राहत, बस तेरी वफ़ा में है।

रवानी: बहाव, गति। निशानी: पहचान, चिह्न। ज़ुबानी: मौखिक, जुबान से कही हुई। जिंदगानी: जीवन, ज़िंदगी। मेहरबानी: कृपा, दया। शय: चीज़, वस्तु।

जुस्तजू: तलाश, खोज। राह: रास्ता। निगाह: नज़र, दृष्टि। अदा: अंदाज़, शैली। चाहत: इच्छा, प्रेम। पनाह: शरण, आश्रय। इबादत: पूजा, उपासना। गुनाह: पाप। वफ़ा: वफादारी, निष्ठा।

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Zainab
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