ज़िंदगी का राज़: फ़ुरक़ान एस ख़ान की एक खूबसूरत ग़ज़ल

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'ज़िंदगी का राज़' ग़ज़ल में जीवन के गहरे अर्थों, खुशियों और गमों पर विचार किया गया है। हिंदी शायरी के प्रेमियों के लिए एक अनमोल पेशकश।

Wednesday, September 9, 2026
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ज़िंदगी का राज़: फ़ुरक़ान एस ख़ान की एक खूबसूरत ग़ज़ल
“ज़िंदगी का राज़: फ़ुरक़ान एस ख़ान की एक खूबसूरत ग़ज़ल”
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https://mail.vews.in/hum-aur-zindagi/zindagi-ka-raaz-a-beautiful-ghazal-by-furkan-s-khan
Date
09 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
हर साँस में छुपी कोई नई अदा क्या है? कभी खुशी, कभी ग़म, ये कैसी सज़ा क्या है? उड़ते परिंदों से पूछो, खुली हवा क्या है? दिल में बजती रहती है, कोई सदा क्या है? हर ज़ख्म को भरने की, बस एक दवा क्या है? ज़िंदगी तू ही बता, तेरा खुदा क्या है?
Ghazal — By Furkan S Khan
ये वक़्त की धार है, बहता चला जाएगा, जो आज है हकीकत, कल बस असर रह जाएगा। हर मोड़ पे ज़िंदगी का, ये कैसा सफ़र रह जाएगा, कुछ यादें बन कर, कुछ आँखों में नज़र रह जाएगा। गुज़र जाएगी ये रातें, सिमट जाएगी ये डगर, बस तेरी कहानी का, कुछ बेखबर रह जाएगा।

इस ग़ज़ल में शायर ज़िंदगी के रहस्य और उसके विभिन्न पहलुओं पर विचार करता है। 'अदा' का अर्थ है अंदाज़ या शैली। 'सज़ा' का अर्थ है दंड। 'सदा' का अर्थ है आवाज़ या पुकार। 'खुदा' यहाँ ज़िंदगी के परम सत्य या नियंता के अर्थ में प्रयुक्त है। हर शेर में ज़िंदगी के किसी न किसी पहलू पर सवाल उठाया गया है।

यह ग़ज़ल समय के प्रवाह और जीवन की क्षणभंगुरता को दर्शाती है। 'धार' का अर्थ है प्रवाह या धारा। 'हकीकत' यानी वास्तविकता। 'असर' का अर्थ है प्रभाव। 'सफ़र' यानी यात्रा। 'नज़र' यानी दृष्टि या झलक। 'डगर' का अर्थ है रास्ता। 'बेखबर' का अर्थ है अनजाना या अज्ञात। शायर बताता है कि सब कुछ गुज़र जाएगा, केवल यादें और प्रभाव ही शेष रहेंगे।

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Zainab
लेखक

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