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ईर्ष्या की अग्नि: मन को जलाती नकारात्मक भावना पर कविता

ईर्ष्या के विनाशकारी प्रभावों पर हृदयस्पर्शी हिन्दी कविता। जानें कैसे यह नकारात्मक भावना आपके सुख-चैन को नष्ट करती है और आंतरिक शांति छीन लेती है।

Friday, September 25, 2026
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ईर्ष्या की अग्नि: मन को जलाती नकारात्मक भावना पर कविता
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25 September 2026
ईर्ष्या की अग्नि: मन को जलाती नकारात्मक भावना पर कविता
दोहे
ईर्ष्या की आग जब, मन में सुलगती है। दूजे की हर ख़ुशी, काँटों सी चुभती है। ये है, जो भीतर ही खोदे। अपने ही सुख-चैन को, इसमें डुबो दे। हर को जला दे, ये ज़हरीला भाव। जीवन के हर रंग को, कर दे ये घाव।
💡 कठिन शब्दों के अर्थ जानने के लिए अंडरलाइन किए गए शब्दों पर टैप करें
Kaafiya सुलगती, चुभती; खोदे, डुबो दे; भाव, घाव
F Poetry ByFurkan S Khan
दोहे
ईर्ष्या की आग जब, मन में सुलगती है। दूजे की हर ख़ुशी, काँटों सी चुभती है। ये है, जो भीतर ही खोदे। अपने ही सुख-चैन को, इसमें डुबो दे। हर को जला दे, ये ज़हरीला भाव। जीवन के हर रंग को, कर दे ये घाव।
💡 कठिन शब्दों के अर्थ जानने के लिए अंडरलाइन किए गए शब्दों पर टैप करें
Kaafiya सुलगती, चुभती; खोदे, डुबो दे; भाव, घाव
F Poetry ByFurkan S Khan

यह कविता 'ईर्ष्या' के विनाशकारी प्रभाव को दर्शाती है। कवि बताता है कि कैसे ईर्ष्या की आग जब मन में सुलगती है, तो दूसरों की खुशी भी काँटों की तरह चुभने लगती है। यह एक गहरा कुआँ है जिसे व्यक्ति अपने भीतर ही खोदता है, और अंततः अपने ही सुख-चैन को उसमें डुबो देता है। ईर्ष्या एक ज़हरीले भाव की तरह है जो जीवन की हर कली को, हर खुशी को जला देता है, और हर रंगीन पल को एक गहरे घाव में बदल देता है। यह कविता हमें इस नकारात्मक भावना से बचने और आंतरिक शांति व संतोष प्राप्त करने की प्रेरणा देती है। यह हमें सिखाती है कि दूसरों की सफलता से जलने के बजाय, हमें अपनी ऊर्जा को अपने विकास और खुशियों पर केंद्रित करना चाहिए। ईर्ष्या केवल व्यक्ति को भीतर से खोखला करती है और उसे कभी वास्तविक सुख नहीं देती।

यह कविता 'ईर्ष्या' के विनाशकारी प्रभाव को दर्शाती है। कवि बताता है कि कैसे ईर्ष्या की आग जब मन में सुलगती है, तो दूसरों की खुशी भी काँटों की तरह चुभने लगती है। यह एक गहरा कुआँ है जिसे व्यक्ति अपने भीतर ही खोदता है, और अंततः अपने ही सुख-चैन को उसमें डुबो देता है। ईर्ष्या एक ज़हरीले भाव की तरह है जो जीवन की हर कली को, हर खुशी को जला देता है, और हर रंगीन पल को एक गहरे घाव में बदल देता है। यह कविता हमें इस नकारात्मक भावना से बचने और आंतरिक शांति व संतोष प्राप्त करने की प्रेरणा देती है। यह हमें सिखाती है कि दूसरों की सफलता से जलने के बजाय, हमें अपनी ऊर्जा को अपने विकास और खुशियों पर केंद्रित करना चाहिए। ईर्ष्या केवल व्यक्ति को भीतर से खोखला करती है और उसे कभी वास्तविक सुख नहीं देती।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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