भीतर की शांति: मन को सुकून देने वाली हिंदी कविता | Furkan S Khan

Furkan S Khan द्वारा लिखित 'भीतर की शांति' कविता पढ़ें। यह जीवन कविता आपको आंतरिक शांति और सुकून का अनुभव कराएगी।

Saturday, September 19, 2026
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भीतर की शांति: मन को सुकून देने वाली हिंदी कविता | Furkan S Khan
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19 September 2026
भीतर की शांति: मन को सुकून देने वाली हिंदी कविता | Furkan S Khan
Life Poetry — By Furkan S Khan
दुनिया का शोर, मन की पुकार, भटकती रूह, खोजे करार। कहीं धूप, कहीं छाँव गहरी, ज़िंदगी की राह कितनी ठहरी। जब साँसें हों धीमी, मन शांत हो, हर धड़कन में कोई संगीत हो। न कोई चाहत, न कोई डर, बस एक सुकून, हर पल बसर। प्रकृति की गोद में, पत्तों की सरसराहट में, छिपी है वो शांति, हर आहट में। अंदर झाँको, वहीं है घर, जहाँ न द्वेष, न कोई ज़हर। मुस्कुराओ, स्वीकारो हर पल को, रंग दो जीवन के हर हलचल को। यही है शांति, यही है सार, भीतर से जब हो जाए प्यार।
Life Poetry — By Furkan S Khan
कभी राहों में कांटे बिखरे, कभी मन के भीतर आँधी फिरे। ये जीवन है, चलता ही जाए, हर मोड़ पर कुछ नया सिखाए। भागती दुनिया, बदलते पल, खो जाते हैं हम, हर हलचल। पर गहरी साँसों में, एक ठहराव है, जहाँ हर शोर का मिटता प्रभाव है। न मंदिरों में, न ऊँचे पहाड़ों में, शांति बसती है, अपने विचारों में। जब द्वेष मिटे, क्षमा हो जाए, तब आत्मा को सच्चा सुकून आए। हर चुनौती को गले लगाना, हर पल को जीना, मुस्कुराना। यही तो है जीवन का सच, यही है सुकून की सच्ची पहुँच।

करार: शांति, सुकून रूह: आत्मा बसर: व्यतीत करना, बिताना सरसराहट: पत्तों की आवाज़ द्वेष: नफरत ज़हर: विष, बुराई सार: निचोड़, महत्व

आँधी फिरे: मन में उथल-पुथल होना, तूफान आना हलचल: शोरगुल, बेचैनी ठहराव: स्थिरता, रुकना प्रभाव: असर द्वेष: नफरत, शत्रुता क्षमा: माफ़ी सुकून: शांति, चैन पहुँच: प्राप्ति, access

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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