दर्द-ए-दिल की दास्तान: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदास ग़ज़ल
फ़ुरक़ान एस ख़ान की यह ग़ज़ल दिल के दर्द, तन्हाई और ज़िंदगी की कड़वी सच्चाइयों को बयाँ करती है। पढ़िए उदासी से भरी एक मार्मिक प्रस्तुति।
दास्तान: कहानी, कथा सज़ा: दंड, पनिशमेंट मौसम-ए-गुल: बसंत का मौसम, फूलों का मौसम शोख़: चंचल, शरारती वफ़ा: वफादारी, निष्ठा तमन्ना: इच्छा, चाहत जज़ा: बदला, परिणाम खफ़ा: नाराज़, रुष्ट बेज़ार: ऊबा हुआ, परेशान बेइंतिहा: जिसकी कोई सीमा न हो, असीमित तन्हाई: अकेलापन दवा: औषधि, इलाज
सितम: ज़ुल्म, अत्याचार अश्क: आँसू चश्म-ए-नम: नम आँखें, आँसुओं से भरी आँखें उम्मीद-ए-वफ़ा: वफ़ादारी की उम्मीद बेवफ़ा: धोखेबाज़, वफ़ादार न रहने वाला भ्रम: गलतफहमी, वहम ग़म: दुख, उदासी अरमान: इच्छाएँ, ख्वाहिशें
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