ज़िंदगी का राज़: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'ज़िंदगी का राज़' एक खूबसूरत हिंदी ग़ज़ल है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं, उसके इम्तिहानों और फ़ानी हक़ीक़त को बयाँ करती है।
बहती हवा: बहती हुई हवा (जीवन की क्षणभंगुरता का प्रतीक) दर्द की दवा: पीड़ा का इलाज अदा: अंदाज़, शैली जुदा: अलग, बिछड़ा हुआ सदा: आवाज़, पुकार इम्तिहान: परीक्षा, कसौटी कारवाँ: यात्रियों का समूह (जीवन यात्रा का प्रतीक) सलीका: तरीका, ढंग राह-ए-फ़ना: नश्वरता का मार्ग, नाश का रास्ता वफ़ा: निष्ठा, ईमानदारी आसरा: सहारा, ठिकाना
संभलना: सावधानी बरतना, खुद को संभालना धूप-छाँव: सुख-दुःख, जीवन के उतार-चढ़ाव ढलकर: अनुकूल होकर, ढलकर निकलना: आगे बढ़ना, उभरना ख़्वाहिशों का दरिया: इच्छाओं का सागर पिघलना: (यहाँ) इच्छाओं के आगे झुक जाना, विचलित होना मचलता: बेचैन, आतुर बहलता: बहलाया हुआ, शांत हुआ राह पर चलना: अपने मार्ग पर आगे बढ़ना दम में दम: जब तक साँस में साँस है, जब तक जीवन है
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
28°C Bahraich
Comments (0)