प्रेरणादायक नज़्म: उम्मीद की लौ - कभी हार न मानें

फ़ुरकान एस ख़ान की 'उम्मीद की लौ' एक प्रेरणादायक नज़्म है जो आपको जीवन की चुनौतियों का सामना करने और कभी हार न मानने की प्रेरणा देती है। अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानें और सफलता की ओर बढ़ें।

Wednesday, September 2, 2026
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प्रेरणादायक नज़्म: उम्मीद की लौ - कभी हार न मानें
“प्रेरणादायक नज़्म: उम्मीद की लौ - कभी हार न मानें”
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https://mail.vews.in/hum-aur-zindagi/inspirational-nazm-flame-of-hope-never-give-up
Date
02 September 2026
Nazm — By Furkan S Khan
जब तक सूरज ढलता नहीं, हिम्मत क्यों हारें राह में? अंधेरों से डरना कैसा, जब रौशनी है चाह में। गिरकर उठना ही तो है जीवन, रुकना है क्या आह में? मंज़िल दूर नहीं, बस कदम बढ़ाओ, गहराई क्या थाह में?
Nazm — By Furkan S Khan
नई सुबह की किरण है, नया आगाज़ है। आज फिर से संवरने को, तेरा हर साज़ है। छिपा है तुझमें इक गहरा, अनकहा राज़ है। उठो, बढ़ो, दुनिया को दिखाओ, तेरा ही ताज है।

राह: रास्ता, पथ चाह: इच्छा, चाहत आह: दुख या निराशा की अभिव्यक्ति (यहाँ रुकने का प्रतीक) थाह: गहराई का अनुमान, सीमा

आगाज़: शुरुआत, प्रारंभ साज़: उपकरण, साधन (यहाँ व्यक्तित्व के गुणों का प्रतीक) राज़: रहस्य, भेद ताज: मुकुट, सम्मान का प्रतीक

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Zainab
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