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हम और ज़िंदगी
जीवन की पुकार: फ़ुरक़ान एस ख़ान की प्रेरणादायक नाज़्म
फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'जीवन की पुकार' नामक यह नाज़्म जीवन के हर पहलू को दर्शाती है। आशा, संघर्ष और प्रेरणा से भरी यह कविता आपको हर पल जीने का संदेश देती है।
Nazm By Furkan S Khan
जीवन एक बहती धारा है,
हर पल एक नया नज़ारा है।
कभी धूप, कभी छाँव का किनारा है,
ये रब का दिया हुआ इशारा है।
कभी गिरना है, कभी संभलना है,
कभी चलना है, कभी ठहरना है।
हर इम्तिहाँ से गुज़रना है,
ये वक़्त का एक मीठा सहारा है।
कुछ ख्वाब अधूरे रह जाते हैं,
कुछ अपने पराए हो जाते हैं।
पर उम्मीद की लौ जलाते हैं,
कि हर रात के बाद सवेरा है।
जी लो हर लम्हा, हर पल को,
सँवार लो अपने आज और कल को।
यही तो है ज़िंदगी का हल को,
जो हर साँस में हमें पुकारा है।
Nazm By Furkan S Khan
समय की चाल देखो, रुकती नहीं,
किसी के आगे ये झुकती नहीं।
हर पल बदलती है, थकती नहीं,
ये ज़िंदगी की कहानी है, छुपती नहीं।
बचपन की गलियाँ, जवानी का जोश,
बुढ़ापे की ख़ामोशी, दिल का ख़ामोश।
हर दौर की अपनी है एक सरगोश,
ये वक़्त का पहिया है, कभी रुकती नहीं।
कुछ ख्वाब सजाए, कुछ टूट गए,
कुछ रिश्ते बने, कुछ छूट गए।
पर हिम्मत न हारी, हम उठ गए,
कि मंज़िल अभी दूर है, झुकती नहीं।
जी ले हर लम्हा, हर एक पल को,
बना ले अपनी राहों के हल को।
न सोच फ़िक्र, अपने आने वाले कल को,
कि ये ज़िंदगी की धारा है, रुकती नहीं।
Nazm By Furkan S Khan
रंग ज़िंदगी के कितने निराले हैं,
कुछ अपने हैं, कुछ अनजाने हैं।
कभी हँसी है, कभी आँसू बहाने हैं,
ये हर पल के नए अफ़साने हैं।
खुशी की लहरें, ग़म के साये हैं,
उम्मीदों के दीप कभी बुझाये हैं।
मगर हौसले कभी न डिगाये हैं,
कि हम तो तूफ़ानों से टकराने वाले हैं।
हर सुबह एक नई किरण लाती है,
हर शाम एक नई सीख दे जाती है।
ये दुनिया हमें जीना सिखाती है,
कि हर रंग में एक नई कहानी है।
जी लो हर पल, हर धड़कन को,
महसूस करो हर एक मौसम को।
यही तो है ज़िंदगी का हर एक दम को,
जो हमें हर पल पुकारते रहते हैं।
जीवन की पुकार
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: नज़ारा, सहारा, पुकारा | Radeef: है
जीवन एक बहती धारा है,
हर पल एक नया नज़ारा है।
कभी धूप, कभी छाँव का किनारा है,
ये रब का दिया हुआ इशारा है।
कभी गिरना है, कभी संभलना है,
कभी चलना है, कभी ठहरना है।
हर इम्तिहाँ से गुज़रना है,
ये वक़्त का एक मीठा सहारा है।
कुछ ख्वाब अधूरे रह जाते हैं,
कुछ अपने पराए हो जाते हैं।
पर उम्मीद की लौ जलाते हैं,
कि हर रात के बाद सवेरा है।
जी लो हर लम्हा, हर पल को,
सँवार लो अपने आज और कल को।
यही तो है ज़िंदगी का हल को,
जो हर साँस में हमें पुकारा है।
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: रुकती, झुकती, थकती | Radeef: नहीं
समय की चाल देखो, रुकती नहीं,
किसी के आगे ये झुकती नहीं।
हर पल बदलती है, थकती नहीं,
ये ज़िंदगी की कहानी है, छुपती नहीं।
बचपन की गलियाँ, जवानी का जोश,
बुढ़ापे की ख़ामोशी, दिल का ख़ामोश।
हर दौर की अपनी है एक सरगोश,
ये वक़्त का पहिया है, कभी रुकती नहीं।
कुछ ख्वाब सजाए, कुछ टूट गए,
कुछ रिश्ते बने, कुछ छूट गए।
पर हिम्मत न हारी, हम उठ गए,
कि मंज़िल अभी दूर है, झुकती नहीं।
जी ले हर लम्हा, हर एक पल को,
बना ले अपनी राहों के हल को।
न सोच फ़िक्र, अपने आने वाले कल को,
कि ये ज़िंदगी की धारा है, रुकती नहीं।
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: निराले, अनजाने, बहाने | Radeef: हैं
रंग ज़िंदगी के कितने निराले हैं,
कुछ अपने हैं, कुछ अनजाने हैं।
कभी हँसी है, कभी आँसू बहाने हैं,
ये हर पल के नए अफ़साने हैं।
खुशी की लहरें, ग़म के साये हैं,
उम्मीदों के दीप कभी बुझाये हैं।
मगर हौसले कभी न डिगाये हैं,
कि हम तो तूफ़ानों से टकराने वाले हैं।
हर सुबह एक नई किरण लाती है,
हर शाम एक नई सीख दे जाती है।
ये दुनिया हमें जीना सिखाती है,
कि हर रंग में एक नई कहानी है।
जी लो हर पल, हर धड़कन को,
महसूस करो हर एक मौसम को।
यही तो है ज़िंदगी का हर एक दम को,
जो हमें हर पल पुकारते रहते हैं।
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