टूटे दिल की दास्तान: फ़ुरकान एस खान की दर्द भरी नाज़्म

फ़ुरकान एस खान द्वारा लिखी गई 'टूटे दिल की दास्तान' नाज़्म में एक टूटे हुए दिल की खामोश पीड़ा और उम्मीदों के खत्म होने का मार्मिक चित्रण है।

Friday, September 18, 2026
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टूटे दिल की दास्तान: फ़ुरकान एस खान की दर्द भरी नाज़्म
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18 September 2026
टूटे दिल की दास्तान: फ़ुरकान एस खान की दर्द भरी नाज़्म
Nazm — By Furkan S Khan
दिल टूटा है, आवाज़ नहीं आती खामोशी है, कोई साज नहीं आती अश्कों की बारिश अब थम सी गई है ज़िन्दगी में कोई आस नहीं आती हर लम्हा अब एक बोझ सा लगता है खुशियों की अब कोई प्यास नहीं आती जो बात कहनी थी, वो अनकही रही अब लबों पे कोई बात नहीं आती
Nazm — By Furkan S Khan
राहों में मेरी अब तन्हाई है हर मोड़ पे बस तेरी परछाई है जो ख्वाब देखे थे, वो टूट गए सब आँखों में अब सिर्फ रुसवाई है दिल के हर कोने में दर्द बसा है साँसों में घुली अब जुदाई है कैसे कहूँ, क्या बीती है मुझ पर हर खुशी अब मुझसे शरमाई है
Nazm — By Furkan S Khan
बिखर गई हैं सारी खुशियाँ जैसे रेत हो हाथों से फिसलियाँ वो रोशनी थी, वो उम्मीद थी अब तो बस है गहरी उदासियाँ यादों का बोझ, दिल पे भारी है आँखों में छाई है अब धुँधलियाँ कैसे सँवारूँ मैं अपनी दुनिया जब टूट चुकी हैं सारी कलियाँ

साज: संगीत, धुन। अश्कों: आँसुओं की। आस: उम्मीद। लबों: होंठों।

तन्हाई: अकेलापन। परछाई: साया। रुसवाई: बदनामी, अपमान (यहाँ मायूसी के अर्थ में)। जुदाई: बिछोह। शरमाई: लज्जित हुई।

फिसलियाँ: फिसली हुई। उदासियाँ: उदासी, निराशा। धुँधलियाँ: धुंधलापन, अस्पष्टता। कलियाँ: फूल की कली (यहाँ उम्मीदों के अर्थ में)।

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Zainab
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