टूटे दिल की दास्तान: फ़ुरकान एस खान की दर्द भरी नाज़्म
फ़ुरकान एस खान द्वारा लिखी गई 'टूटे दिल की दास्तान' नाज़्म में एक टूटे हुए दिल की खामोश पीड़ा और उम्मीदों के खत्म होने का मार्मिक चित्रण है।
साज: संगीत, धुन। अश्कों: आँसुओं की। आस: उम्मीद। लबों: होंठों।
तन्हाई: अकेलापन। परछाई: साया। रुसवाई: बदनामी, अपमान (यहाँ मायूसी के अर्थ में)। जुदाई: बिछोह। शरमाई: लज्जित हुई।
फिसलियाँ: फिसली हुई। उदासियाँ: उदासी, निराशा। धुँधलियाँ: धुंधलापन, अस्पष्टता। कलियाँ: फूल की कली (यहाँ उम्मीदों के अर्थ में)।
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