ज़िंदगी: एक सफ़र - Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल

Furkan S Khan द्वारा प्रस्तुत ज़िंदगी पर एक मार्मिक ग़ज़ल। यह ग़ज़ल जीवन के उतार-चढ़ाव, धूप-छाँव और आंतरिक शांति की खोज को खूबसूरती से बयां करती है।

Saturday, September 5, 2026
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ज़िंदगी: एक सफ़र - Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
“ज़िंदगी: एक सफ़र - Furkan S Khan की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल”
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Date
05 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
ज़िंदगी एक सफ़र है, कभी धूप कभी बहार है। क्या पता किस मोड़ पर, कैसा नया खुमार है। साँसों की ये डोर है, उलझी हुई एक तार है। मिल जाए गर सुकून तो, दिल को मिलता करार है।
Ghazal — By Furkan S Khan
हर पल यूँ ही जीवन का, पलकों से गुज़र जाए। क्या खोया क्या पाया, ना कुछ भी ख़बर जाए। राहों पे चला था मैं, मंज़िल ना नज़र आए। दर्द-ए-दिल लिए फिरता, ना कोई असर जाए।

खुमार: नशा या मस्ती। करार: शांति, स्थिरता। यह ग़ज़ल ज़िंदगी के सफ़र को धूप-छाँव और अनिश्चितताओं से भरा बताती है, जहाँ सुकून की तलाश है।

गुज़र जाए: बीत जाए। ख़बर: जानकारी। मंज़िल: लक्ष्य। असर: प्रभाव। यह ग़ज़ल जीवन के अनजाने सफ़र, खोने-पाने की अनिश्चितता और मंज़िल की तलाश में भटकते दिल के दर्द को दर्शाती है।

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Zainab
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