आत्मा की पुकार: गहन आध्यात्मिक हिन्दी कविता | Furkan S Khan

Furkan S Khan द्वारा रचित यह आध्यात्मिक हिन्दी कविता 'आत्मा की पुकार' आपको आंतरिक शांति और आत्म-खोज की यात्रा पर ले जाती है, जहाँ दिव्य प्रकाश भीतर ही मिलता है।

Sunday, September 20, 2026
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आत्मा की पुकार: गहन आध्यात्मिक हिन्दी कविता | Furkan S Khan
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20 September 2026
आत्मा की पुकार: गहन आध्यात्मिक हिन्दी कविता | Furkan S Khan
Micro Poetry — By Furkan S Khan
बाहर की दुनिया, कितनी शोर भरी है, मन की वीरान गलियां, क्यों इतनी डरी है? खोया रहा मैं भीड़ में, खुद को भूलाकर, पर एक आवाज़ अंदर से, रही सदा पुकार। रुक जा ज़रा, साँस ले, इस पल में ठहर, भीतर तेरे ही तो है, वो शाश्वत लहर। न मंदिर में, न मस्जिद में, न ऊँचे पहाड़ों पर, मिलता है वो नूर, अपनी ही धड़कनों के पार। हर किरण में, हर बूँद में, उसी का तो वास है, जो तू ढूँढ रहा बाहर, वो तेरे ही पास है। मिटा दे ये परदे, खोल दे आँखें अंतर की, मिल जाएगा तुझे, सुकून तेरी बसर की। ये आत्मा की पुकार है, अनसुनी न कर, इसी में है तेरा जीवन, इसी में है तेरा घर।
Micro Poetry — By Furkan S Khan
शोर से भरी दुनिया में, एक कोना चुप का है, जहाँ मन की गहराई में, ब्रह्मांड का रूप का है। नज़रें फेर ज़रा बाहर से, भीतर झाँक के देख, यहाँ तारों की महफ़िल है, और चाँद की रेख। हर साँस में है जीवन का, एक गहरा राज़ छुपा, हर धड़कन में है ईश्वर का, असीम प्रकाश जपा। ये सोच कि तू अकेला है, ये भ्रम ही तो तेरा है, हर कण में है तू शामिल, हर चीज़ में बसेरा है। वो विशाल सागर भी, तेरी आँखों में समाया है, वो ऊँचा पर्वत भी, तेरी रूह ने बनाया है। छोड़ दे ये दौड़, ये भाग-दौड़, ये माया का जाल, तू ही तो है वो शक्ति, जो बदल दे हर हाल। ढूँढ ले खुद को खुद में, तू ही तो है वो आधार, जो है भीतर तेरे, वो ही है सारा संसार।

वीरान: सुनसान, desolate शाश्वत: हमेशा रहने वाला, eternal नूर: प्रकाश, दिव्य चमक, divine light अंतर: भीतर, अंदर, inner बसर: जीवन, existence

ब्रह्मांड: universe राज़: secret असीम: limitless, infinite भ्रम: illusion, delusion माया: illusion, worldly attachments आधार: foundation, base

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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