इश्क़ की गहराई: एक हसीन ग़ज़ल

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई इश्क़ पर एक खूबसूरत ग़ज़ल, जिसमें मोहब्बत की गहराई और यादों के एहसास को बयां किया गया है।

Sunday, August 30, 2026
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इश्क़ की गहराई: एक हसीन ग़ज़ल
“इश्क़ की गहराई: एक हसीन ग़ज़ल”
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Date
30 August 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
तेरी यादों का साया हर सू छाया हुआ है, मेरा दिल तेरे इश्क़ में डूबा हुआ है। ये कैसी कशिश है, क्या जादू चलाया है, हर तरफ तेरा ही अक्स नज़र आया है। ज़माना क्या कहे, मुझे परवाह नहीं है, बस तेरे दीदार की हसरत दिल में समाया है। ये कैसा मंज़र है, मैं खोया सा रहता हूँ, तेरे ख़्यालों में ही मेरा जहाँ बसाया है। अकेला हूँ, पर तेरी मोहब्बत का सहारा है, इस तन्हा सफ़र में तू ही मेरा साया है। ये इबादत है मेरी, ये मेरा ईमान है, तेरे इश्क़ में ही मैंने रब को पाया है।
Ghazal — By Furkan S Khan
ये इश्क़ की बातें, ये दिल की ज़ुबानी है, तेरी आँखों में छुपी मेरी जिंदगानी है। हर लम्हा तेरे संग एक ख़्वाब सुहाना है, तू ही मेरी हकीकत, तू ही मेरी कहानी है। ये कैसी ख़ुशबू है, जो महका रही है, तेरे प्यार की हवाओं में ये रवानी है। हर धड़कन पे तेरा ही नाम लिखा है, ये इश्क़ की रीत, ये कैसी रवानी है। गुज़रे पल जो तेरे संग, वो अनमोल हैं, हर याद तेरी, दिल पे एक निशानी है। तेरे बिना ये दुनिया बेरंग सी लगती है, तू ही मेरी जवानी, तू ही मेरी रवानी है।

सू: दिशा, हर तरफ़ कशिश: खिंचाव, आकर्षण दीदार: मुलाक़ात, दर्शन अक्स: प्रतिबिंब, छाया सफ़र: यात्रा, रास्ता इबादत: पूजा, भक्ति ईमान: विश्वास, आस्था

ज़ुबानी: ज़बान से कही हुई, मौखिक जिंदगानी: जीवन, ज़िन्दगी हकीकत: सच्चाई, यथार्थ ख़ुशबू: सुगंध, महक रवानी: प्रवाह, बहाव रीत: तरीका, नियम अनमोल: जिसका कोई मूल्य न हो, कीमती बेरंग: रंगहीन, फीका

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Zainab
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