Furkan S Khan की इश्क की राहें: एक खूबसूरत नज़्म

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई 'इश्क की राहें' नामक एक दिल को छू लेने वाली नज़्म, जो प्रेम की गहराई और दीवानगी को दर्शाती है।

Sunday, August 30, 2026
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Furkan S Khan की इश्क की राहें: एक खूबसूरत नज़्म
“Furkan S Khan की इश्क की राहें: एक खूबसूरत नज़्म”
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Date
30 August 2026
Nazm — By Furkan S Khan
तेरी आँखों में जब से है, मैंने दुनिया को देखा, हर पल तेरी यादों में, मेरा दिल है बहका, ये कैसा जादू है तेरा, हर तरफ तेरा ही नशा, तेरे प्यार की चाहत में, मैं हूँ बेबस, बेसाख्ता। तेरी मुस्कान जैसे, भोर की पहली किरण, तेरे संग ही बीते, हर लम्हा, हर क्षण, खो जाऊं तेरी बाहों में, यही है मेरा अरमान, तेरे इश्क़ में डूबा, मैं हूँ तेरा दीवाना।
Nazm — By Furkan S Khan
तेरे प्यार में खोया, जैसे कोई मुसाफ़िर, ढूंढता है मंज़िल, पर मिलता नहीं किनारा। तू ही मेरा सब कुछ, तू ही मेरा सहारा, तेरे बिना जीवन, सूना, अधूरा है। हर साँस में तेरी खुशबू, हर धड़कन में तेरा नाम, तू ही मेरी दुनिया, तू ही मेरा पैगाम। तेरे इश्क़ की आग में, जलता हूँ हर शाम, तू ही मेरी मंज़िल, तू ही मेरा मुक़ाम।

नज़र: दृष्टि, निगाहें। सहर: सुबह, प्रभात। बेबस: लाचार। बेसाख्ता: अनायास, स्वाभाविक रूप से। अरमान: इच्छा, अभिलाषा।

मुसाफ़िर: यात्री। मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य। सहारा: आसरा, मदद। पैगाम: संदेश। मुक़ाम: स्थान, दर्जा।

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Zainab
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