प्रेरणादायक शायरी: उठो, चलो, बढ़ते रहो - Furkan S Khan

Furkan S Khan द्वारा लिखित यह प्रेरणादायक शायरी आपको जीवन में आगे बढ़ने, चुनौतियों का सामना करने और अपने सपनों को पूरा करने का हौसला देती है।

Saturday, September 5, 2026
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प्रेरणादायक शायरी: उठो, चलो, बढ़ते रहो - Furkan S Khan
“प्रेरणादायक शायरी: उठो, चलो, बढ़ते रहो - Furkan S Khan”
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05 September 2026
Shayari — By Furkan S Khan
गिरकर उठना है तुम्हें, फिर से चलना है तुम्हें। मंज़िलें पुकार रही, अब ना रुकना है तुम्हें। हिम्मतें ना हारना, हर चुनौती पार कर। ख्वाब सच करने का अब, हौसला रखना है तुम्हें।
Shayari — By Furkan S Khan
खुद में है तेरी पहचान, क्यों बाहर तलाशता है तू। तेरी हिम्मत, तेरा ज़ोर, क्यों औरों से पूछता है तू। जो ठान ले दिल से गर, हर मुश्किल राह आसान है। फिर क्यों अपनी मंज़िल से, यूँ अक्सर रूठता है तू।
Shayari — By Furkan S Khan
संघर्ष से कभी ना घबरा, ये जीवन का ही तो सार है। हर ठोकर एक सीख देती, हर हार के बाद जीत का द्वार है। लगातार कोशिशें कर, तू पाएगा अपनी मंज़िल को। क्योंकि मेहनत करने वालों का, कभी ना होता इंकार है।

मंज़िलें: गंतव्य या लक्ष्य। हिम्मतें: साहस, बहादुरी। चुनौती: मुश्किल कार्य, बाधा। हौसला: दृढ़ संकल्प, जोश।

तलाशता: ढूँढता, खोजता। ज़ोर: शक्ति, बल। ठान ले: दृढ़ निश्चय कर ले। रूठता: नाराज़ होता, मुँह मोड़ता।

संघर्ष: कठिनाइयों से जूझना, प्रयत्न। सार: निचोड़, महत्व। ठोकर: बाधा, मुश्किल। इंकार: अस्वीकृति, मनाही (यहाँ अर्थ है 'सफलता से वंचित नहीं रहना')।

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Zainab
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