इश्क़ का दरिया - Furkan S Khan की ख़ूबसूरत ग़ज़ल

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई इश्क़ पर एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल 'इश्क़ का दरिया', जो प्रेम की गहराई और चाहत को बयाँ करती है।

Wednesday, September 2, 2026
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इश्क़ का दरिया - Furkan S Khan की ख़ूबसूरत ग़ज़ल
“इश्क़ का दरिया - Furkan S Khan की ख़ूबसूरत ग़ज़ल”
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https://mail.vews.in/hum-aur-zindagi/ishq-ka-dariya-beautiful-ghazal-by-furkan-s-khan
Date
02 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
तेरी आँखों में एक गहरा अहसास है, मेरे दिल को तेरी चाहत की प्यास है। हर पल तेरे ख़यालों में खोया रहूँ, ये कैसा तेरा जादू, कैसा ख़ास है। तेरी बातों में शहद घुला, वो मुस्कान, मेरे जीने का अब यही आस है। हर धड़कन तेरी धुन पर चलती है, ये कैसा तेरा इश्क़, कितना ख़ास है। तेरी यादों के साए में जी लूँ, यही मेरी आरज़ू, यही आस है। तू ही मंज़िल, तू ही रास्ता मेरा, तू ही मेरा आज, तू ही कल ख़ास है।
Ghazal — By Furkan S Khan
मेरे दिल में छुपा एक अनकहा राज़ है, जब तू बोले, लगे तेरी मीठी आवाज़ है। धड़कनें भी थम सी जाती हैं पल भर, तेरे होने से ही तो हर उल्लास है। तेरी हँसी में छुपा है वो नूर, जिससे रोशन मेरा हर ख़्वाब ख़ास है। तुझे देखूं तो भूल जाऊं दुनिया सारी, तेरी मोहब्बत में ये कैसा एहसास है। जब से तू मिली है, ज़िंदगी हसीन है, तू ही मेरी सुबह, तू ही शाम ख़ास है। हर दुआ में बस तेरा ही नाम आए, तू ही मेरा रब, तू ही मेरी आस है।

अहसास - भावना, एहसास चाहत - प्रेम, इच्छा ख़ास - विशेष, अनमोल शहद - मधुर, मीठा आस - आशा, उम्मीद आरज़ू - इच्छा, अभिलाषा मंज़िल - लक्ष्य, गंतव्य

अनकहा - जो कहा न गया हो राज - भेद, रहस्य उल्लास - ख़ुशी, हर्ष नूर - प्रकाश, चमक हसीन - सुंदर, ख़ूबसूरत रब - ईश्वर, भगवान आस - आशा, उम्मीद

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Zainab
लेखक

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