ज़िंदगी का सफ़र: Furkan S Khan की खूबसूरत गज़ल

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई ज़िंदगी के सफ़र पर एक दिल को छू लेने वाली गज़ल। जीवन के उतार-चढ़ाव और अनुभवों को बयां करती ये कविता।

Tuesday, September 8, 2026
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ज़िंदगी का सफ़र: Furkan S Khan की खूबसूरत गज़ल
“ज़िंदगी का सफ़र: Furkan S Khan की खूबसूरत गज़ल”
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08 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
हर लम्हा एक नया रंग, ये ज़िंदगी, कभी धूप, कभी छाँव, क्या सफ़र है। हर मोड़ पे कुछ सिखाती, ये ज़िंदगी, कभी जीत, कभी हार, क्या ख़बर है। ख्वाबों की दुनिया सजाए, ये ज़िंदगी, कभी हकीकत, कभी फरेब, क्या असर है। रिश्तों की डोर से बंधा, ये ज़िंदगी, कभी प्यार, कभी तकरार, क्या खबर है। खुशियों का पल समेटे, ये ज़िंदगी, कभी गम, कभी राहत, क्या बसर है। हर साँस एक कहानी कहती, ये ज़िंदगी, कब क्या हो जाए, किसी को क्या ख़बर है।

बसर: गुज़रना, बीतना मगर: लेकिन, परन्तु असर: प्रभाव, नतीजा ख्वाब: सपना हकीकत: सच्चाई फरेब: धोखा रिश्तों: नातों तकरार: झगड़ा, विवाद समेटे: इकट्ठा करना राहत: आराम, सुकून साँस: श्वास कहानी: कथा

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Zainab
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