ज़िंदगी का सफ़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'ज़िंदगी का सफ़र' ग़ज़ल में जीवन के उतार-चढ़ाव, आशाओं और अनिश्चितताओं का मार्मिक चित्रण। इस खूबसूरत हिंदी ग़ज़ल को पढ़ें।

Saturday, September 12, 2026
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ज़िंदगी का सफ़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
“ज़िंदगी का सफ़र: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल”
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12 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
ये ज़िंदगी का कैसा अजब सफ़र है, क्या है? हर मोड़ पर नई इक राहगुज़र है, क्या है? कभी धूप है, कभी छाँव का असर है, क्या है? ये शाम है कि सुबह की कोई ख़बर है, क्या है? नज़रों में है धुंधलापन, कहाँ नज़र है, क्या है? पलकों पे ठहरा आँसू, ये दर्द-ए-जिगर है, क्या है? हर साँस में छुपी कोई हसरत है, क्या है? ये रूह की पुकार है या कोई लहर है, क्या है?
Ghazal — By Furkan S Khan
ये ज़िंदगी की कैसी अजीब कहानी जाती है, हर मोड़ पर बदलती निशानी जाती है। समझे नहीं कभी हम वक़्त की रवानी जाती है, हर पल नया सिखा कर पुरानी जाती है। दिल में बसी हुई है कोई बात ज़ुबानी जाती है, ये दुनिया है फ़ानी, हर चीज़ फ़ानी जाती है।
Ghazal — By Furkan S Khan
हर साँस में इक नई सी डगर है मुझको, ये ज़िंदगी का कैसा अनोखा सफ़र है मुझको। क्या खो गया, क्या मिला, न कोई ख़बर है मुझको, हर पल में एक नया सा असर है मुझको। ढूँढूं कहाँ सुकून, किस ओर मेरी नज़र है मुझको, ये दिल की बेकरारी, ये कैसा डर है मुझको।

राहगुज़र: रास्ता, मार्ग असर: प्रभाव दर्द-ए-जिगर: दिल का दर्द हसरत: इच्छा, तमन्ना लहर: तरंग, मौज

रवानी: बहाव, गति फ़ानी: नश्वर, मिट जाने वाला

डगर: रास्ता असर: प्रभाव बेकरारी: बेचैनी

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Zainab
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