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उदासी पर एक मार्मिक ग़ज़ल | Furkan S Khan
Furkan S Khan द्वारा लिखी गई उदासी पर एक खूबसूरत ग़ज़ल। तन्हाई और जुदाई के दर्द को बयां करती यह कविता हर दिल को छू जाएगी।
Monday, August 31, 2026
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“उदासी पर एक मार्मिक ग़ज़ल | Furkan S Khan”
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31 August 2026
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Ghazal — By Furkan S Khan
जब से तूने छोड़ा है, मैं तन्हा अकेला हूँ
वीरानों में खोया हूँ, जैसे कोई मेला हूँ
आँखों में नमी छाई, दिल में है एक हूक सी
हर लम्हा तेरे बिन, मैं बेबस सा झेला हूँ
यादों के भँवर में हूँ, खुद को मैं कैसे सँभालूँ
साँसों की डोरी पतली, बस मौत का झमेला हूँ
हर आहट पे तुझको, मैं तकता रहूँ कब तक
ज़िंदगी के सफ़र में, मैं थका सा चेला हूँ
'फ़ुरकान' तन्हाई में, अब कौन है मेरा साथी
इस भीड़ में भी देखो, मैं सबसे जुदा खेला हूँ
Kaafiya: अकेला, मेला
Radeef: हूँ
तन्हा: अकेला वीरानों: सुनसान जगह हूक: तीव्र वेदना या आह भँवर: चक्रवात, उलझन आहट: पदचाप, आवाज़ चेला: शिष्य, अनुयाvođa
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