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प्रेम की बहार: फरकान एस खान की खूबसूरत क़िता
फरकान एस खान द्वारा लिखित 'प्रेम की बहार' एक खूबसूरत क़िता है जो प्रेम के आगमन से जीवन में आई खुशियों और मस्ती का वर्णन करती है।
Monday, August 31, 2026
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“प्रेम की बहार: फरकान एस खान की खूबसूरत क़िता”
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31 August 2026
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Qita — By Furkan S Khan
जब से तू आया है जीवन में, हर पल बहार है।
दिल की हर धड़कन में अब तो, तेरा ही खुमार है।
तेरी मोहब्बत की ये कैसी, अनोखी पुकार है।
हर साँस में बस अब तो, तेरा ही इकरार है।
Kaafiya: बहार, खुमार, पुकार, इकरार
Radeef: है
Qita — By Furkan S Khan
मोहब्बत का अफ़साना, ये कभी ना ख़त्म होगा।
दिलों में जलता शमा, ये कभी ना मंद होगा।
जो रूह से जुड़ जाए, वो रिश्ता अमर होगा।
ये प्यार का संगम है, सदा ही सुंदर होगा।
Kaafiya: ख़त्म, मंद, अमर, सुंदर
Radeef: होगा
यह कविता प्रेम के आगमन से जीवन में आई खुशियों, नशे और स्वीकार्यता को दर्शाती है। 'बहार' का अर्थ है वसंत या रौनक। 'खुमार' का अर्थ है नशा या मस्ती। 'पुकार' का अर्थ है बुलावा या आह्वान। 'इकरार' का अर्थ है स्वीकार या सहमति।
यह कविता प्रेम को एक शाश्वत कहानी, कभी न बुझने वाली लौ और अमर रिश्ते के रूप में प्रस्तुत करती है। 'अफ़साना' का अर्थ है कहानी या कथा। 'शमा' का अर्थ है दीपक या लौ। 'मंद' का अर्थ है धीमा या बुझा हुआ। 'अमर' का अर्थ है जो कभी न मरे, शाश्वत। 'संगम' का अर्थ है मिलन या confluence।
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