ग़म का सफ़र: दिल को छू लेने वाली मसनवी कविता

फरकान एस खान की 'ग़म का सफ़र' मसनवी कविता पढ़ें, जो दुख और उदासी के गहरे भावनात्मक सफ़र को बयां करती है। दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ।

Saturday, September 19, 2026
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ग़म का सफ़र: दिल को छू लेने वाली मसनवी कविता
“ग़म का सफ़र: दिल को छू लेने वाली मसनवी कविता”
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19 September 2026
ग़म का सफ़र: दिल को छू लेने वाली मसनवी कविता
Masnavi — By Furkan S Khan
ग़म का इक ऐसा कारवाँ चला, कि हर ख़ुशी से रास्ता बदल गया। दिल के हर कोने में अंधेरा छा गया, रूह का हर परिंदा उदास हो गया। पलकों पे ठहरा हुआ अश्कों का पानी, कहता है बिन कहे कोई दर्द की कहानी। साँसों की लय में भी अब दर्द है शामिल, जैसे हर लम्हा हुआ हो कोई मुश्किल। ख्वाबों के शीशे भी चकनाचूर हुए, उम्मीद के तारे भी अब दूर हुए। ये कैसा बोझ है जो उठाना है मुझे, हर रोज़ अपनी ही आग में जलना है मुझे। ख़ामोशी चीख़ती है, सिसकियाँ भरती है, ये ज़िंदगी बिन तेरे कैसे गुज़रती है। हर आह में छिपा है एक गहरा राज़, टूटा है दिल का हर इक साज।
Masnavi — By Furkan S Khan
ये उदासी का कैसा है आलम, कि हर साँस में घुला है ग़म। तन्हाई का साया है इतना गहरा, हर उम्मीद का दामन है ठहरा। दिल की वादियों में सन्नाटा है छाया, जैसे हर ख़ुशी को हो किसी ने ठुकराया। आँखों में नमी है, लबों पे ख़ामोशी, कब तक सहेंगे ये दर्द की सरगोशी। कोई आवाज़ नहीं, कोई दस्तक नहीं, ये ज़िंदगी का सफ़र है अब तक। हर लम्हा गुज़रे है एक सदियों सा, जैसे दिल हो मेरा, पत्थरों सा। रौशनी ढूँढता है ये बेचैन मन, पर मिलती नहीं कोई राह, कोई किरण। ये कैसा दर्द है, जिसकी दवा नहीं, ज़िंदगी में अब कोई दुआ नहीं।

कारवाँ: काफिला, यात्रा रूह: आत्मा अश्क: आँसू लय: ताल, गति चकनाचूर: टूटकर बिखर जाना सिसकियाँ: रोने की धीमी आवाज़

आलम: स्थिति, दुनिया ग़म: दुख, उदासी दामन: आँचल, किनारा वादियाँ: घाटियाँ सन्नाटा: खामोशी, चुप्पी सरगोशी: फुसफुसाहट, धीमी आवाज़

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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