प्रकृति का मौन संगीत: एक सुन्दर हिन्दी माइक्रो पोएट्री

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई प्रकृति पर एक सुन्दर हिन्दी माइक्रो पोएट्री। प्रकृति के शांत संगीत और सौंदर्य का वर्णन।

Saturday, September 19, 2026
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प्रकृति का मौन संगीत: एक सुन्दर हिन्दी माइक्रो पोएट्री
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19 September 2026
प्रकृति का मौन संगीत: एक सुन्दर हिन्दी माइक्रो पोएट्री
Micro Poetry — By Furkan S Khan
हरियाली की चादर ओढ़े, पर्वत खड़ा नीली झील का जल दर्पण सा अड़ा कलकल बहती नदियाँ, गीत सुनाती हैं शांत हवाएँ सरगम सी बहलाती हैं सूरज की किरणें, सोना बिखेरतीं पंछियों के कलरव, सुबह को जगातीं फूलों की मुस्कान, मन को मोहती प्रकृति की गोद में, शांति मिलती हर पल एक नया रंग, नया रूप दिखाती जीवन की उलझनें, पल भर भुला जाती यह मौन संगीत, आत्मा को छू जाए ईश्वर की अनुपम रचना, मन को भाए यही तो प्रकृति की असली माया है ईश्वर की शक्ति का, साक्षात रूप काया है

काया: शरीर, देह। अनुपम: जिसकी उपमा न दी जा सकती हो, अद्वितीय।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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