जीवन की धारा: फ़ुरक़ान एस ख़ान की प्रेरणादायक नज़्म

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'जीवन की धारा' एक सुंदर नज़्म है जो जीवन के उतार-चढ़ाव, आशा और निरंतरता को बयां करती है। प्रेरणा से भरी यह कविता हर पल जीने का संदेश देती है।

Tuesday, August 25, 2026
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जीवन की धारा: फ़ुरक़ान एस ख़ान की प्रेरणादायक नज़्म
“जीवन की धारा: फ़ुरक़ान एस ख़ान की प्रेरणादायक नज़्म”
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25 August 2026
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Nazm By Furkan S Khan
जीवन की धारा है, बहती ही रहेगी, हर पल नई राह, ये कहती ही रहेगी। कभी फूल खिलेंगे, कभी कांटे मिलेंगे, ये दुनिया की रीत है, चलती ही रहेगी। सूरज का उगना है, ढलना भी होगा, हर रात के बाद, सवेरा भी होगा। ना खोना हिम्मत, ना रुकना कहीं पर, ये उम्मीद की लौ है, जलती ही रहेगी। ग़म आएँ या ख़ुशियाँ, ये सब तो मुसाफ़िर, गुज़र जाएँगे एक दिन, बनके एक हाज़िर। बस जीते रहो तुम, हर साँस को लेकर, ये ज़िन्दगी की धर्ति, फलती ही रहेगी।
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Nazm By Furkan S Khan
इश्क़ एक राह है, मंज़िल भी यही है, जो इस राह चले, वो हासिल भी वही है। ये रूह का रिश्ता है, ये दिल का तराना, मोहब्बत की दुनिया, ये कामिल भी यही है। कभी दर्द दे जाए, कभी ख़ुशियाँ लुटाए, ये हर रंग दिखाए, ये हर रूप सजाए। ना इसकी कोई सीमा, ना इसका किनारा, ये सागर है ऐसा, जो साहिल भी यही है। जो इश्क़ में डूबे, वो पार उतर जाए, जो इससे डरे, वो किनारे ही मर जाए। ये ज़ीस्त का हासिल है, ये रूह का सफ़र, खुदा की नेमत है, ये फ़ाज़िल भी यही है।
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Nazm By Furkan S Khan
उम्मीद का चिराग़ है, बुझने न देना, अंधेरे में भी इसको, छुपने न देना। ये रौशनी है दिल की, ये जीने की धुन है, कभी आसमाँ से इसको, टूटने न देना। हर रात के बाद है, इक नई सुबह का आना, हर पतझड़ के बाद, बहारों का छाना। ये कुदरत का दस्तूर है, बदलता ही रहेगा, बस तुम अपनी उम्मीद को, मरने न देना। ग़म आएँ या ख़ुशियाँ, ये सब तो गुज़रते हैं, हवा के झोंके जैसे, आते-जाते रहते हैं। यकीन रखो ख़ुद पर, और खुदा की रहमत पर, ये हौसले की किरण है, घटने न देना।

जीवन की धारा

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: बहती, कहती, चलती, जलती, फलती  |  Radeef: ही रहेगी
जीवन की धारा है, बहती ही रहेगी, हर पल नई राह, ये कहती ही रहेगी। कभी फूल खिलेंगे, कभी कांटे मिलेंगे, ये दुनिया की रीत है, चलती ही रहेगी। सूरज का उगना है, ढलना भी होगा, हर रात के बाद, सवेरा भी होगा। ना खोना हिम्मत, ना रुकना कहीं पर, ये उम्मीद की लौ है, जलती ही रहेगी। ग़म आएँ या ख़ुशियाँ, ये सब तो मुसाफ़िर, गुज़र जाएँगे एक दिन, बनके एक हाज़िर। बस जीते रहो तुम, हर साँस को लेकर, ये ज़िन्दगी की धर्ति, फलती ही रहेगी।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: मंज़िल, हासिल, कामिल, साहिल, फ़ाज़िल  |  Radeef: भी यही है
इश्क़ एक राह है, मंज़िल भी यही है, जो इस राह चले, वो हासिल भी वही है। ये रूह का रिश्ता है, ये दिल का तराना, मोहब्बत की दुनिया, ये कामिल भी यही है। कभी दर्द दे जाए, कभी ख़ुशियाँ लुटाए, ये हर रंग दिखाए, ये हर रूप सजाए। ना इसकी कोई सीमा, ना इसका किनारा, ये सागर है ऐसा, जो साहिल भी यही है। जो इश्क़ में डूबे, वो पार उतर जाए, जो इससे डरे, वो किनारे ही मर जाए। ये ज़ीस्त का हासिल है, ये रूह का सफ़र, खुदा की नेमत है, ये फ़ाज़िल भी यही है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: बुझने, छुपने, टूटने, मरने, घटने  |  Radeef: न देना
उम्मीद का चिराग़ है, बुझने न देना, अंधेरे में भी इसको, छुपने न देना। ये रौशनी है दिल की, ये जीने की धुन है, कभी आसमाँ से इसको, टूटने न देना। हर रात के बाद है, इक नई सुबह का आना, हर पतझड़ के बाद, बहारों का छाना। ये कुदरत का दस्तूर है, बदलता ही रहेगा, बस तुम अपनी उम्मीद को, मरने न देना। ग़म आएँ या ख़ुशियाँ, ये सब तो गुज़रते हैं, हवा के झोंके जैसे, आते-जाते रहते हैं। यकीन रखो ख़ुद पर, और खुदा की रहमत पर, ये हौसले की किरण है, घटने न देना।

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Zainab
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